अनुनाद

anunad
समाज और संस्कृति

ये कैसी हूक सी उठती है ख़ामोशी के सीने से…आत्मा को मथता आर्तनाद/ जगजीत सिंह पर कौशलेन्द्र सिंह का लेख

स्मृति की रेखाएँ जीवन में जितना पीछे जाती हैं एक धुंधली सी तस्वीर उभरती है, जहाँ किसी यात्रा में मैं वाहन में कोई संगीत सुन

Read More »
आलोचना / समीक्षा

मंगलेश डबराल के सहारे अंतर्यात्रा-बहिर्यात्रा / भास्‍कर उप्रेती

मुझे यात्रा संस्मरण बहुत लुभाते हैं। यह, अपने भीतर के उन खाली कोनों को भरने का इलहाम देते हैं, जो भरे नहीं जा सके या

Read More »
कविता

भटकने से एक दिन मिल ही जाता है इस जनम के गूढ़ सवालों का जवाब/ योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं

  योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्‍दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये कविताएं कहीं-कहीं छायावाद और

Read More »
कविता

और इसी भीड़ में सबसे बड़ा अकाल मनुष्य का है/ शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं

  शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्‍तर पर व्‍याप्‍त विषमताओं से व्‍याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे में सूरज की किरण

Read More »
कविता

अपने बच्चों में ख़ुदा की सूरत देखती माँओं को क्या ज़वाब दोगे तुम/कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं

कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्‍यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में लौटती  इन कविताओं का

Read More »
कविता

जिन नदियों को पृथ्वी पर जगह न मिली उन्होंने चुन लिया मनुष्य की आँखों में रहना!/ज्योतिकृष्ण वर्मा की कविताएं

ज्‍योतिकृष्‍ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे आख्‍यान के रूप में

Read More »
कविता

वह धुंआ, तपती जमीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा – अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु की कविताओं का स्‍वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से

Read More »
कविता

तुम्हें ख़ून चूसने वालों के दांतों से अधिक चुभना चाहिए उनका भिंचा हुआ जबड़ा / पल्‍लवी की कविताऍं

पल्‍लवी की कविताएं समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों,पाखंड से संवेदना भरे मन में होने वाली उथल-पुथल को सामने लाती हैं। इन विसंगतियों से पार पाने के

Read More »
कहानी

महाकवि पिण्टा सुबोधिनी – प्रचण्‍ड प्रवीर

दोनोँ रचनाओँ की अन्‍यत्र अस्वीकृति के कारण निम्न हैँ: –   महाकवि पिण्टा की अस्वीकृति के कारण इस तरह बताए गए थे –१. विद्वेषपूर्ण रचना –

Read More »

सभी श्रेणियाॅं

समाज और संस्कृति

कविता

कथेतर गद्य

आलोचना-समीक्षा

अन्‍य

error: Content is protected !!
Scroll to Top