अनुनाद

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कविता

घाटी की छोटी-छोटी जलधाराओं ने हमेशा ही रखना चाहा उसके रहवास को जीवित/ हिमांशु विश्‍वकर्मा की कविताएं

       हिमांशु की कविताएं अपने आस-पास बिखरे लोक की भावनाओं को उसी के डिक्‍शन में अभिव्‍यक्‍त करती हैं, जहां कहीं ये कविताएं उस

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कविता

हम कभी इतने रिक्त नहीं होते कि उनकी आवाज़ सुन सकें/ दीप्ति कुशवाह की कविताएं

दीप्ति कुशवाह की ये कविताएं, शोर से बहुत दूर पाठक को अपने भीतर के एकांत में ले जाती हैं। निरन्‍तर बाहर की उलझनों से क्‍लांत

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कहानी

देहरी/ कल्पना जसरोटिया

     कल्पना जसरोटिया की कहानी ‘देहरी’ आज के समय में भी गॉंवों में खेती-मज़दूरी से बसर करने वालों की ख़स्‍ता-हालत, शोषण और अंधविश्‍वासों की

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आलोचना / समीक्षा

इमिग्रेंट – विदेश में युवाओं के संघर्ष की रोचक कथा/ अतुल्य खरे

धर्मपाल महेंद्र जैन एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जो वतन से दूर रहकर कभी अपनी मिट्टी से दूर न हो सका, और वहाँ रहकर भी सतत

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समाज और संस्कृति

ये कैसी हूक सी उठती है ख़ामोशी के सीने से…आत्मा को मथता आर्तनाद/ जगजीत सिंह पर कौशलेन्द्र सिंह का लेख

स्मृति की रेखाएँ जीवन में जितना पीछे जाती हैं एक धुंधली सी तस्वीर उभरती है, जहाँ किसी यात्रा में मैं वाहन में कोई संगीत सुन

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आलोचना / समीक्षा

मंगलेश डबराल के सहारे अंतर्यात्रा-बहिर्यात्रा / भास्‍कर उप्रेती

मुझे यात्रा संस्मरण बहुत लुभाते हैं। यह, अपने भीतर के उन खाली कोनों को भरने का इलहाम देते हैं, जो भरे नहीं जा सके या

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कविता

भटकने से एक दिन मिल ही जाता है इस जनम के गूढ़ सवालों का जवाब/ योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं

  योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्‍दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये कविताएं कहीं-कहीं छायावाद और

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कविता

और इसी भीड़ में सबसे बड़ा अकाल मनुष्य का है/ शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं

  शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्‍तर पर व्‍याप्‍त विषमताओं से व्‍याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे में सूरज की किरण

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कविता

अपने बच्चों में ख़ुदा की सूरत देखती माँओं को क्या ज़वाब दोगे तुम/कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं

कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्‍यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में लौटती  इन कविताओं का

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कविता

जिन नदियों को पृथ्वी पर जगह न मिली उन्होंने चुन लिया मनुष्य की आँखों में रहना!/ज्योतिकृष्ण वर्मा की कविताएं

ज्‍योतिकृष्‍ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे आख्‍यान के रूप में

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