Tuesday, July 4, 2017

मनुष्यता का महान आख्यान : कमल जोशी/1


कमल दा से तीन-चार मुलाक़ातें थीं पर परिचय बहुत पुराना था। साथ उनकी यायावरी के कई क़िस्से थे। वे अचानक चले गए। पुलिस ने प्रथम दृष्टया इस चले जाने को आत्मघात कहा है, जांच अभी चलेगी। उनका जाना और इस तरह जाना एक सदमा है। उनके लिए जाने कितनों का दिल फफक रहा है। उनसे किताबों के आवरण के लिए चित्र मांगता था, पता न था उनके बाद उनसे इस तरह चित्र मांगने होंगे।  

इन चित्रों को चार-पांच पोस्ट्स में यहां लगाऊंगा, ताकि कुछ और लोग उस नायाब दिल को देख पाएं, जो केवल कमल दा के पास था। वे फोटोग्राफर नहीं, विचारक थे। उनकी वैचारिकी का पता उनकी ये तस्वीरें बेहतर देती हैं। पढ़िए मनुष्यता के उस महान आख्यान को, जिसे कमल जोशी अपनी तस्वीरों में लिख गए हैं।

******

स्त्रियां

1.
2. 
3. 
4. 
   
5.
 6.
7.
8.
 9.
10.
11.
 12.
13.
14.
15.
 
 


 ......अगली पोस्ट में जारी




4 comments:

  1. बेहतरीन हर तस्‍वीर।

    ReplyDelete
  2. विजया सतीJuly 3, 2020 at 11:56 AM

    सजीव चित्र कथाएं

    ReplyDelete
  3. विजया सतीJuly 3, 2020 at 11:57 AM

    सजीव चित्र कथाएं

    ReplyDelete

यहां तक आए हैं तो कृपया इस पृष्ठ पर अपनी राय से अवश्‍य अवगत करायें !

जो जी को लगती हो कहें, बस भाषा के न्‍यूनतम आदर्श का ख़याल रखें। अनुनाद की बेहतरी के लिए सुझाव भी दें और कुछ ग़लत लग रहा हो तो टिप्‍पणी के स्‍थान को शिकायत-पेटिका के रूप में इस्‍तेमाल करने से कभी न हिचकें। हमने टिप्‍पणी के लिए सभी विकल्‍प खुले रखे हैं, कोई एकाउंट न होने की स्थिति में अनाम में नीचे अपना नाम और स्‍थान अवश्‍य अंकित कर दें।

आपकी प्रतिक्रियाएं हमेशा ही अनुनाद को प्रेरित करती हैं, हम उनके लिए आभारी रहेगे।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails