Wednesday, January 20, 2016

प्रेमपत्र - नवीन रमण


हिंदी की कथा और कविता,दोनों में, प्रेमपत्र बहुत दिव्य किस्म की भावुकता का शिकार पद है। कहना न होगा कि प्रेमपत्र कहते ही किस कविता और किस तरह की  कविताओं की याद हमें आती है। नवीन रमण को मैं फेसबुक पर जानता हूं, उतना ही, जितना फेसबुक आपको जानने देता है। वे ख़ूब तीखी राजनीतिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, समाज में हो रहे हर उलटफेर, उसकी हर विकृति पर उनकी निगाह है। राजनीति के प्रपंचों के बीच उनके बयान हमेशा मनुष्यता के पक्ष में होते हैं। वे सच्चे अर्थ में आधुनिक दृष्टिसम्पन्न युवा हैं। यहां प्रस्तुत किए जा रहे प्रेमपत्र एक अपूर्व प्रयोग है, जिसे नवीन समाज की प्रयोगशाला में परख रहे हैं। इनमें वह गिजगिजी भावुकता नहीं है। हरियाणा की मिट्टी और उसके ठेठपन से भरे ये छोटे-छोटे आख्यान, जो मिलकर उस महाख्यान का हिस्सा हो जाते हैं, जिसे 'प्रेम' कहा जाता है। 

अनुनाद नवीन रमण का स्वागत करता है और पाठकों से इन प्रेमपत्रों पर प्रतिक्रिया की आशा करता है। 
***


1
जय मां गूगा माई की

काले, तू आपणी मां नै समझांदा क्यूं नी । आज फेर तेरी मां नै ओए काम करया । मेरी मां गोस्से (गोबर के उपले) पाथ के आई और तेरी मां ने गा (गाय) खुली छोड़ दी । थारी गा (गाय) ने सारे गोस्से फोड़ दिए । मां सारा दिन बरड़-बरड़ करदी रही । गोस्से थारी गा फोडै अर आफत म्हारे जी नै होज्या सै ।इतनी भूंडी (गंदी) गाल दी है मां नै थारे तै अक पूछै मत । नास जाणी के भाई मरियो । बीज मरणया कै कीड़े पड़ कै मरियो ।
किसे दिन ये रोळा (झगड़ा) हो कै रहवैगा । फेर मत कहिए यो के होया । चै तै समझा दे आपणी मां नै । नहीं तै खामखा बात घणी बढ़ ज्यागी ।
कित तो हाम (हम) इतणी बढ़िया-बढ़िया बात लिख्या कर दे । कित इब यै बात लिखणी पड़ री सै । असल मैं  लूल्लू की मां करवा री यो सारा क्लेस । उसके बोये बीज सै । वा हे तेरी मां के आगै उल्टी-सुल्टी पोये जा सै । तेरी मां कै कुछ समझ कोणी आंदा । तेरी मां तै गऊ सै । वा सै असली चंडाळी । जिस धोरै (पास) बैठे उडै (वहीं) लट्ठ बजवा दे सै । हामनै तै वा घर तै भजा दी थी । उसकी ए भड़क ले री सै ।
तू कॉलेज नी जांदा (जाता) इब । सारी हाण ( हर टाइम) घरा ए पडया रै सै । फैल होग्या के ।कॉलेज जाया करता था तो नहाया-धोया बढ़िया लत्ते (कपड़े) पैरे रह था । इब तै कती पाळी ( भैंस चराने वाला) बरगा बणया रह सै । जूण से पैन गेल (साथ) तू लिख कै दिया करै ओह ए पैन मेरे तै भी ल्या कै दिए ।

तेरी आपणी

2
जय दादा खेड़े की 
जान से भी प्यारी ...
जिस दिन तेरी शक्ल नहीं देखता उस दिन दिल को चैन नहीं मिलता ।आज चौथा दिन हो गया तुझसे मिले और देखे । एक तो तेरा घर ही ऐसी गली में है, जो बंद है । किसी भी बहाने से तेरी गली में नहीं जाया जा सकता । दूसरा तेरा वो खडूस बुड्ढा पड़ोसी जो हमेशा बाहर गली में ही बैठा रहता है । हर किसी को बोलता रहेगा गली बंद है । किसके जाना है ।सबसे बड़ी आफत भैंस बिकने से हुई है । तेरे पापा ने अच्छी भैंस बेंची । अब शाम को मिलना बन्द ही हो गया । कम से कम गोबर के बहाने शाम को एक मुलाकात तो हो ही जाती थी । अपनी सहेली के साथ ही आ जाया कर । जब तक तुम्हारी भैंस नहीं आ जाती । अब तो तुम बरसात में ही खरीद पाओगे भैंस । गर्मी में रेट वैसे ही बढ़ जाते है भैंस के । क्या कुछ लग रहा है कब तक खरीद लेगा तेरा पापा भैंस ?
चल कल तो मिलने का मौका है ही । भगवान उसके बाल-बच्चों को लंबी उम्र दे,जिसने सोमवार के व्रत शुरू किए । तीन-चार दिन होने चाहिए थे शिवजी के । थोड़ी वारी-सी आइयो । तब तक भीड़ कम हो जाएगी । वो गुलाबी सूट पहनकर आइयो । जो तुने बबलू के ब्याह में पहना था । और उस फत्तु की बहु के साथ मत आइयो । पक्की डैण है वा । सारे गाम में ढिंढोरा पीट देगी जो उसनै शक हो गया तो ।

आई लव यू जान
.....................
फूलों से ज्यादा पसंद खुशबू को करता हूं
अपने से घणा ज्यादा तुझको प्यार करता हूं ।
2016 के नए साल की मुबारक

3
तुझे भी नया साल मुबारक हो ।
ये साल आये बार-बार
यूँ हर बार लेकर बहार
हम यूँ ही रहे मिलते
और बगिया में फूल खिलते
लोग भी यूँ रहे जलते

देख मेरे पास पैसे तो होते नहीं । मैं तुझे देना तो चाहती हूँ बढ़िया और महंगा वाला कार्ड । तूने जो कार्ड दिया है उस पर जो सेंट छिड़का है उसकी खुशबू घणी बढ़िया है। मुझे वैसा ही सेंट चाहिए। हमने तो आज गाजरपाक बनाया है ।माँ सुबह तीन बजे ही बनाने लग गयी थी । पता है आज के हुआ । जब माँ चूल्हा जलाने के लिए कागज ढूंढ रही थी तो तेरा लव लैटर किताब से थोड़ा-सा बाहर रह गया था। माँ ने तो कागज का कान-सा पकड़ के खींच लिया और सीधा चूल्हे में । वो तो मैंने देख लिया और तुरन्त उसके दोनों हाथ पकड़कर उसे जलने से बचाया । छोरी तो खूब जलै आग मैं आज  लब लैटर भी जल गया होता । यो भी बढ़िया है अक माँ अनपढ़ है ।नहीं तो पढ़ते ही जलाने पड़ते । देख मैं खुद तेरे लैटर जलाती हूँ पर जब माँ जलाने लगी तो ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर का कोई हिस्सा जल जायेगा। पर तब तक नहीं जलाती जब तक अगला नहीं मिल जाता । कई बार पढ़ती हूँ । इस बहाने पढ़ने की भी आदत हो गयी है।
आज तू मुझे समोसे जरूर खिलाना ।
नए साल की शुभकानाएं
तुझे भी नया साल मुबारक

4. 
जय बजरंग बली
प्यारी कमलेश
                        I                     LOVE                              YOU
हिम्मत-सी करके लिख ही रहा हूं । पता नहीं तुम तक ये पहुंच भी पाएगा की नहीं । वैसे तो मेरा उस्ताद मना करता है कि छोरियों के चक्कर में जो पड़ गया, वो कदे पहलवान नहीं बण सकता । पर के करूं तू मनै लाग्गै-ए घणी कसूत्ती सै ।         तू भी यो पढ़कर के सोचेगी की किसा माणस है । किसी-किसी बात लिख दी है । कभी लिखा नहीं है कोई लैटर । यो पहला है । चै स्कूल में छुट्टी के लिए लिखे थे । वैसे भी बात पहुंचनी चाहिए जैसे भी पहुंच जाए ।
मेरा प्यार कती असली है ।मैंने उस्ताद की खिलाई कसम भी तोड़ दी । उसने लगोट पकड़कर हनुमान की कसम खिलवाई थी । पर बहुत दिन मन मार के रह लिया । अब नहीं रहा जाता ।हनुमान भी वैसे ही बदनाम कर दिया जै हनुमान नै लुगाई तै इतनी दिक्कत होती तो राम-सीता बाबत रावण के साथ क्यों लड़ते ? फालतू की बात घणी लिख दी । असली बात तो या सै अक मन्नै तू घणी चोखी लाग्गै सै ।
अर जब तू गोबर का तसला सिर पर रखकर चलती है तो पीछे से घणी कसूत्ती लगती है । बस नू मान मेरा दिल आ गया है तेरे पै । तू भी तो देखते ही हंसने लग जाती है । बस वा तेरी हंसी कती कालजे मैं जाकै लाग ज्या सै ।बस या हंसी तू मेरे ऊपर ऐसे ही लुटाती रहणा ।मन्नै ओर कुछ नहीं मांगा बजरंग बली से ।जय बजरंग बली,तोड़ दे दुश्मन की नली ।
इसनै पढ़कै फाड़ दिए । नहीं तो फंस सकै सै ।
तन्नै तेरी मां की कसम है, जवाब जरूर दिए ।

तेरा आपणा
जस्सा / जसबीर पहलवान

5
पतासे बरगी सुदेस

एक तो तू आपणा पैन बदल ले । सारे लैटर पै इसा लागै जणू लीला रंग थूक दिया हो किसे नै । इस पैन गेल के तू ब्याह राखी सै ।फैकती क्यूं नी इसनै ।तेरे लिखै तै बत्ती तो यो पैन फैंक दे सै । मेरे साले पैन कै दस्त लाग रे सै ।चै जड़ मै एक लोगड ( रूई) धर लिया कर अर इसकी राल (लार) पूछती रहया कर लिखदी हाण ।
आगली काम की बात सुण तू इब ।

चंद्रावल फीलम देखणी हो तो परसो चालैगी शशीकांत चमरवे बामणा कै ।आज उसका छोरा कहवै था । अक बुक कर आए बीसीआर ।दो होर फिलम ल्यावैंगे । नई आली । पर पहलै चंद्रावल चलावैंगे । महासिंह कै लाए थे जब भी रैहगी थी तू देखे बिना । इबकै तै कती सही मौका सै । उनकी छोरी तो तेरे गेल पढै सै । घर आले भी कोनी नाटै (मना करना) । उनका छोरा कहवै था अक खबीले चूडे का रंगीन टीबी भी मांग लिया है हामनै । काले-धोले मै कोनी मजा आंदा,जितना रंगीन मैं आवै सै ।वै आपणे चोतरे (चबूतरा) पै धर कै चलावैंगे । म्हारे बरगे (जैसे) भी देख लेंगे । नहीं तै हामनै भीत्तर कूण बडण(घुसना) देंदा ।इस भाने (बहाने) तन्नै भी सारी रात देख ल्यूंगा ।

इब देख ले तनै आपणे घर आले क्यूकर राजी करणे सै ।मौका तै कती (बिल्कुल) लठ बरगा(जैसा) पडया सै (लाठी की तरह मजबूत बहाना है आने का) । मेरे आगै तो तू बाता की सोड-सी (रजाई भरना) भर दे सै । घरा तेरा कती घीटवा (गला) सूख ज्या सै ।
अर लैटर मैं मेरा नाम फत्तू क्यूं लिख्या करै । राकेस क्यूं नी लिखदी तू ।

तेरा गुड बरगा राकेस

6.
बबीता, करया नै तन्नै ओए काम । मैं नाटू (मना) था अक म्हारे  घरा इतनी बै मत आया कर । आज मां कह री थी अक रणबीर की छोरी के पां (पैर) के नीचै कुछ आरया सै । कती चकरी काटदी फीरे जा सै । कई दिन तै या पाणी लेण भी घणी बै आण लाग (आने लगी) ली । जरूर कुछ चक्कर सै । कीसे गेल्ला (किसी के साथ) पक्का मूंह काळा करदी होगी । नहीं तै जवान छोरी का इतनी चकरी काटण का कूणसा (कौन-सा) मतलब सै । रणबीर की तै अकल फूट री सै पर उसकी बहू नै भी कुछ नी दिखता ।इनका तै खरणा-ए (खानदान) खराब सै । इनकी बुआ भी आधे गाम नै नचागी थी ।

तू इब कई दिन कम आइये । तेरै भी बेरा (पता ) नी के भड़क सै । बार-बार के देखण आया करै तू । तेरा जी नी भरदा देखे बिना । पता नी के होज्या सै देख कै ।

न्यू करिए आज रात नै साग (सब्जी) मं मिला दिए दुवाई । सात बजे खा ल्योगे तो 9 बजे तयी घर वाले टै हो ज्यांगे । थारे चुबारे पै कोनी आया जांदा इब । महेंद्र नै आपणी भीत (दीवार)  ऊंची कर दी । थारे बगड़ (आंगन) मं कै आणा पडैगा । उडै (वहीं ) चुबारे पै मिलिए । बता दीए कदे तेरा बाबू आज भी खेत मं तै वारी आंदा हो । उस दिन तो बस बचगे । नहीं तै फसे-फंसाए थे उस दिन । पी रहया तेरा बाबू तो पता कोनी चाल्या ।

जय दादा खेड़े की


3 comments:

  1. जमीन से जुड़े खट्टी मीठी गुदगुदा देने वाले प्रेम पत्र।
    मज़्ज़ा आ गया।

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  2. घणी चोक्खि प्रेमपत्र है जी। मनरंजक!

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  3. बोत्ते घणी प्यारी चिट्ठी से .....इब हम का बोल्ले... मिलने के सौ बहाने ढूंढते और ग्रामीण जीवन की ढेरों बातो के बीच मिलने की ऊहापोह .. ऐसी चिट्ठिया सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों में ही चलती होंगी जहाँ का माहोल इसमें दीखता है ..वर्ना आजकल के बच्चे वाट्सएप, फेसबुक ट्वीटर इ मेल .. जाने कौन कौन से आधुनिक हथकंडों से लेस है ..हां बहाने वो भी खोजते होंगे ... गजब की चिट्ठियां जिनके के माध्यम से ठेट हहरयाणवी गाँव दीखता है ..

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