Saturday, March 19, 2011

शामिल

चित्र गूगल से साभार

आजकल न मैं किसी उत्सव में शामिल हूँ
न किसी शोक में
न किसी रैली-जुलूस में
किसी सभा में नहीं
न किसी बाहरी ख़ुलूस में

मैं आग में शामिल हूँ आजकल
लाल-पीली-नीली हुई जाती लपटों में नहीं
भीतरी धुंए में
जलती हुई आँखें मलता मैं सूर्यास्त में शामिल हूँ
जिसके बारे में उम्मीद है
कि कल वह सूर्योदय होगा !
***

4 comments:

  1. वाह....आजकल मैं भी

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  2. वाह!! मेरे अन्दर भी धुआं उठता रहा है पिछले कुछ दिनों

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  3. मैं आग में शामिल हूँ आजकल.......स्वयं के पास होने जैसा हैं.
    बढ़िया ....

    ReplyDelete

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