Friday, March 5, 2010

नाज़िम हिक़मत की एक कविता

अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र

तुर्की के विश्व प्रसिद्द कवि नाज़िम हिक़मत की ये बेहद चर्चित युद्ध विरोधी कविता हिरोशिमा पर अमेरिकी अणु बम गिराए जाने के दस साल बाद लिखी गयी थी और दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओँ में न केवल इसका अनुवाद हुआ बल्कि अनेक देशों के शांति कार्यकर्ताओं और जनगायकों ने इसको अपने युद्ध विरोधी अभियान का प्रतीक बना लिया.पाल रोब्सन,पीट सीगर जैसे अमेरिकी लोकगायकों ने तो इस कविता को अपनी आवाज दी ही,अनेक अन्य गायकों ने दुनिया के अन्य हिस्सों में इसका चयन और पाठ किया.हिरोशिमा के नरसंहार के साठ साल पूरे होने पर जापान की लोकप्रिय गायिका चितोसे हाजिमे ने इस कविता का जापानी अनुवाद प्रस्तुत किया. इस कविता के अनेक अनुवाद उपलब्ध हैं.यह प्रस्तुति jeanette turner के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित है..

दरवाज़े दरवाज़े

दरवाज़े दरवाज़े मैं चल चल के आई
पर किसी को सुनाई नहीं देती मेरी पदचाप
खटखटाती हूँ दरवाज़ा पर दिखाई देती नहीं
कि मैं मर चुकी हूँ..मर चुकी हूँ मैं...

बस सात बरस की थी जब मैं मरी
इस बात को बीत गए सालों साल
अब भी मैं सात बरस की ही हूँ जैसी तब थी
कि मर जाने के बाद कहाँ बढ़ते हैं बच्चे...

मेरी लटें झुलस गयी थीं लपलपाती लौ से
ऑंखें जल गयीं..फिर मैं अंधी हो गयी
मृत्यु लील गयी मुझे और हड्डियों की बना डाली राख
फिर अंधड़ ने रख को उड़ा दिया यहाँ वहां...

मुझे फल की दरकार नहीं,न ही चाहिए भात
मुझे टॉफी की दरकार नहीं,न ही चाहिए मुझे ब्रेड
मेरी अपने लिए बाक़ी नहीं कोई लालसा
की मैं मर चुकी हूँ..मर चुकी हूँ मैं..

मैं आपके दरवाजे आयी हूँ अमन मांगने
आज आप ऐसी लड़ाई छेड़ें..ऐसी जंग
कि इस दुनिया के बच्चे जिन्दा बचें
फलें फूलें, बढ़ें, हंसें और खेलें कूदें...

***

5 comments:

  1. बेहतरीन बेहतरीन .... शुक्रिया पढवाने का !!

    ReplyDelete
  2. उफ़! बेहद मार्मिक ....पढ़ाने के लिए आभार !!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    ReplyDelete
  3. भूमिका देकर बहुत अच्छा किया. लगे हाथों जानकारी भी हो गयी.

    ReplyDelete
  4. उफ़…इन सवालों के जवाब क्यूं नहीं दे पाये हम अब तक?

    ReplyDelete

यहां तक आए हैं तो कृपया इस पृष्ठ पर अपनी राय से अवश्‍य अवगत करायें !

जो जी को लगती हो कहें, बस भाषा के न्‍यूनतम आदर्श का ख़याल रखें। अनुनाद की बेहतरी के लिए सुझाव भी दें और कुछ ग़लत लग रहा हो तो टिप्‍पणी के स्‍थान को शिकायत-पेटिका के रूप में इस्‍तेमाल करने से कभी न हिचकें। हमने टिप्‍पणी के लिए सभी विकल्‍प खुले रखे हैं, कोई एकाउंट न होने की स्थिति में अनाम में नीचे अपना नाम और स्‍थान अवश्‍य अंकित कर दें।

आपकी प्रतिक्रियाएं हमेशा ही अनुनाद को प्रेरित करती हैं, हम उनके लिए आभारी रहेगे।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails