Friday, March 27, 2009

गीत चतुर्वेदी की कविताएँ

(गीत युवा पीढी की एक बहुत बड़ी सम्भावना और महत्वाकांक्षा हैं। उनसे उम्मीदें बहुत ऊंची हैं और इस ऊँचाई को पाने का रचनात्मक साहस और प्रतिभा उनमें खूब है। इससे अधिक और कुछ न कहते हुए यहाँ प्रस्तुत हैं उनकी दो कविताएँ ....)


नीम का पौधा

यह नीम का पौधा है
जिसे झुककर
और झुककर देखो
तो नीम का पेड़ लगेगा
और झुको, थोड़ा और
मिट्टी की देह बन जाओ
तुम इसकी छांह महसूस कर सकोगे
इसकी हरी पत्तियों में वह कड़ुवाहट है जो
ज़ुबान को मीठे का महत्व समझाती है

जिन लोगों को ऊंचाई से डर लगता है
वे आएं और इसकी लघुता से साहस पाएं।


चोर गली

कुछ कहते हैं
कविता में इन शब्दों को मत आने दो
मुझे याद आता है नासिक का काला राम मंदिर
जहां द्वार पर खड़ा बाभन कहता था
इन लोगों को मंदिर में मत आने दो

सच बताओ
कभी देखा है विजेताओं को शरणस्थली की तलाश में
वर्षों दशकों शताब्दियों सहस्राब्दियों की चोर गली में
छुप-छुपकर चलते हैं पराजित ही

सूचकांक जो बढ़ते जाते हैं
कूदकर मरने का विकल्प बचाए आदमी को ताकि
एक नई ऊंचाई मिल सके कूदने के वास्ते

खुद तय कर लो क्या अहम है
जो कहा गया
या
जो समझा गया

यह पराजितों का डिस्को नहीं
कहे गए और समझे गए के बीच चोर गली में
थिर है पाठ से छूट गई पंक्ति
जो पराजित थे वही तो सही हैं !


11 comments:

  1. दोनों कविताएं बहुत पसंद आईं, शिरीष भाई। संभालकर रखे जाने लायक। अब ब्लॉग पर सबके लिए यह काम तो आप कर ही रहे हैं।

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  2. Achha blog. achhi samagri. Geet ki poems apealing hain

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  3. नीम का पौधा मुझे बहुत पसंद है। उस पर मैंने दो पेंटिंग्स की थीं। यहां फिर पढ़ी, फिर अच्छी लगी। इसका मतलब है कि यह अच्छी कविता है।

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  4. neem ka paudha mujhe bahut pasand hai...mere jante mangleshji ko bhi...shayad we is par kuch gadya bhi likhna chahte hain...

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  5. शिरीष जी बहुत बढ़िया ब्लॉग है आपका. कुछ कवितायेँ पसंद आई रात की रानी की तरह महकती हुई. पढूंगा तो विस्तार से लिखूंगा !

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  6. अमान मौला जी,योगेन्द्र कृष्णा जी और किशोर चौधरी जी आप पहली बार मेरे ब्लाग पर आए और टिप्पणी दी। आपका स्वागत है! आते रहिएगा!

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  7. sahi kaha ! jo paraajit the, wahi to sahi hain. main varshon se yahi sochta aa raha hoon ki jinke paas aastha hai, unke paas saadhan nahin hain & jinke paas saadhan hain, unmein aastha nahin hai.

    ----------pankaj chaturvedi
    kanpur

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  8. चोरगली संज्ञा स्त्री० [हिं० चोर + गली] १. वह पतली और तंग गली जिसे बहुत कम लोग जानते हों । २. पायजामे का वह भाग जो दोनों जांघों के बीच में रहता है ।

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  9. बहुत अच्छी कविताएँ हैं !

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  10. बहुत अच्छी कविताएँ हैं !

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