Thursday, December 25, 2008

आज का एक और शोक ..... हैरॉल्ड पिंटर का जाना !

चिट्ठाजगत पर आकर पता लगा - ब्रिटेन के नाटककार और नोबेल पुरस्कार विजेता हैरॉल्ड पिंटर का 78 साल की उम्र में निधन हो गया है। पिंटर को 2005 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। हैरॉल्ड पिंटर लंबे समय से कैंसर बीमारी से पीड़ित थे। उनके लिखे प्रमुख नाटकों में द बर्थडे पार्टी, द डम्ब वेटर और द होमकमिंग शामिल हैं। अनुनाद यहाँ गहन शोक व्यक्त करने के साथ ही व्योमेश शुक्ल द्वारा अनूदित उनकी एक कविता प्रस्तुत करता है .... यह कविता पहले सबद में छप चुकी है और अब व्योमेश ने इसे अनुनाद के लिए उपलब्ध कराया , इसके लिए आभार !

पिंटर की कविता : मौत
(अनुवाद : व्योमेश शुक्ल)


लाश कहाँ मिली ?
लाश किसे मिली ?
क्या मरी हुई थी लाश जब मिली थी ?
लाश कैसे मिली ?

लाश किसकी थी ?

कौन पिता या बेटी या भाई
या चाचा या बहन या माँ या बेटा
था मृत और परित्यक्त शरीर का ?

क्या लाश मरी हुई थी जब फेकी गई ?
क्या लाश को फेका गया था ?
किन्होंने फेका था इसे ?

लाश नंगी थी कि सफर की पोशाक में ?

तुमने कैसे घोषित किया कि लाश मरी हुई है ?
क्या तुम्हीं ने घोषित किया कि लाश मरी हुई है ?
तुम लाश को इतना बेहतर कैसे जानते थे ?
तुम्हें कैसे पता था कि लाश मरी हुई है ?

क्या तुमने लाश को नहलाया ?
क्या तुमने उसकी दोनों आँखे बन्द की ?
क्या तुमने लाश को दफनाया ?
क्या तुमने उसे उपेक्षित छोड़ दिया ?
क्या तुमने लाश को चूमा ?

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