Wednesday, December 24, 2008

पंकज चतुर्वेदी की कविताएं

पंकज चतुर्वेदी की कविताएं _ इतना ही कहूंगा कि सहजता प्राण है इनका !

इच्छा

मैंने तुम्हें देखा
और उसी क्षण
तुमसे बातें करने की
बड़ी इच्छा हुई

फिर यह सम्भव नहीं हुआ

फिर याद आया
कि यह तो याद ही नहीं रहा था
कि हमारे समय में
इच्छाओं का बुरा हाल है !
***

कुछ चीज़ें अब भी अच्छी हैं

कुछ चीज़ें अब भी अच्छी हैं

न यात्रा अच्छी है
न ट्रेन के भीतर की परिस्थिति

लेकिन गाड़ी नंबर
गाड़ी के आने और जाने के समय की सूचना देती
तुम्हारी आवाज़ अच्छी है

कुछ चीज़ें अब भी अच्छी हैं !
***

अखंड मानस पाठ

एक



जिस भी विधि मेरा हित सधे
हित करना भगवान
और जल्द ही
इसी के हित
मैं दास हूं तुम्हारा

`जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा
करहु सो बेगि दास मैं तोरा´

यह था सम्पुट
जो कविता के
बीच से
चीखता था बार-बार
कविता से छिटकी हुई
यातना-सा !

दो

रातभर चलता रहा
अखंड मानस पाठ

सवेरे यह बच रहा एहसास
किस विकट बेसुरेपन से
गाए गए तुलसीदास !
***

8 comments:

  1. कुछ कविताएं अब भी अच्छी हैं, जैसे कि पहली और दूसरी।

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  2. सही कहा आपने सहजता ही जान है इन कविताओं की! हिंदी में लिखना अब मैंने सीख लिया!

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  3. दूसरी कविता पसन्द आयी.अभी भी बहुत सारी सुन्दरता बची हुई है.

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  4. पंकज चतुर्वेदी की कवितायें {तस्वीर भी} यहाँ देखक्र यह आलसी खुश हुआ> बहुत अच्छा .

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  5. ग़नीमत है !

    "कुछ चीज़ें अब भी अच्छी हैं ..."

    उम्दा ...

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  6. pankaj jee pahli kavita ko chhor baki sab nirash karti hai??
    uspar se inka lebal shreshth kavitayen kavita or aapka majak hi urati hai...aap shreshth rachnakar hai??
    apni garima ka khyal rakhiye...ASHOKVAJPAYEE jee ki tarah likhne ke liye kuchh bhi likhne ki jarurat nahi hai....
    is ummid ke saath ki aage behtar rachnayen milen...

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  7. अनुनाद पर प्रकाशित किसी रचना पर प्राप्त हर तरह की प्रतिक्रिया का स्वागत किया जाता है। कभी अतिवादी अनर्गलता हुई तो ही उस टिप्पणी को हटाया जाता है। फिरदौस जी ने पंकज की कविताओं पर टिप्पणी करते हुए ऐसी भंगिमा अपनाई जैसे कि वे कविताएं खुद पंकज ने ब्लाग पर लगाई हों! उन्हें श्रेष्ठ कविता के लेबल तले मैंने लगाया हैं। मेरा निवेदन है कि टिप्पणी लगाने से पहले ये जरूर देख लें कि किसने पोस्ट लगाई है। आपको भी आसानी होगी और हमें भी! अनुनाद हमेशा तारीफ की कामना नहीं करता, वो संवाद में यकीन रखता है और ऐसे सभी संवादों का स्वागत है। फिरदौस दुबारा आइए- बार बार आइए - आपकी टिप्पणी हमारे लिए महत्वपूर्ण होगी।

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  8. अनुनाद पर प्रकाशित किसी रचना पर प्राप्त हर तरह की प्रतिक्रिया का स्वागत किया जाता है। कभी अतिवादी अनर्गलता हुई तो ही उस टिप्पणी को हटाया जाता है। फिरदौस जी ने पंकज की कविताओं पर टिप्पणी करते हुए ऐसी भंगिमा अपनाई जैसे कि वे कविताएं खुद पंकज ने ब्लाग पर लगाई हों! उन्हें श्रेष्ठ कविता के लेबल तले मैंने लगाया हैं। मेरा निवेदन है कि टिप्पणी लगाने से पहले ये जरूर देख लें कि किसने पोस्ट लगाई है। आपको भी आसानी होगी और हमें भी! अनुनाद हमेशा तारीफ की कामना नहीं करता, वो संवाद में यकीन रखता है और ऐसे सभी संवादों का स्वागत है। फिरदौस दुबारा आइए- बार बार आइए - आपकी टिप्पणी हमारे लिए महत्वपूर्ण होगी।

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