Tuesday, October 28, 2008

आयेंगे अच्छे दिन - दिवाली पर एक शुभेच्छा !


मित्रो !
मैं गोरख पांडे की दुनिया से बाहर नहीं आ पा रहा हूँ ! लगता है कि उम्मीदें बची हैं अभी, हालाँकि वैसे लोग नहीं बचे अब ! आप सुनिए सालों पार से आती - ढाढस बंधाती ये लरज़ती आवाज़ -



जन संस्कृति मंच का एक बार फिर आभार !

10 comments:

  1. जरूर आयेंगे दोस्त!!

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  2. घोर निराशा के समय में इस आवाज़ का हौसला बहुत...बहुत है। अच्‍छे दिनों की आस...एक विश्‍वास, लेकिन एक भय भी है उसके टूट जाने का। तो भी आज के लिए बहुत ज़रूरी आवाज़ है ये।

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  3. जरूर आयेंगे...

    दीपावली के इस शुभ अवसर पर आप और आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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  4. प्रतीक्षा जरूर रंग लाएगी।

    दीपावली की शुभकामनाएं।

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  5. ज़रूर आयेंगे अच्छे दिन. ज़रूरी ये है कि ख्वाब ज़िन्दा रहें.... उम्मीद बरक़रार रहे ...

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  6. दीपावली ऎसी ही उम्मीदों की रोशनी जगमगाए।

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  7. आयेंगे अच्छे दिन आयेंगे

    गई हज़ारहा आँखों से नींद
    न गए मगर ख़्वाब न गए

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  8. जाने क्यों उम्मीद भी उदास कर जा रही है? अब वीरेन डंगवाल की कविता `आएंग अच्छे दिन' का पाठ भी करा देना।

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  9. और शिरीष भाई, जाने किस उदासी में यह पोस्ट कर दी, राम-रहीम करना तक भूल गया। दीवाली मुबारक।

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  10. दोस्त, अपने सिस्टम पर अभी सुनने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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