Wednesday, July 16, 2008

असद ज़ैदी की कविता

मुझसे साफ़ करने को कहा जाएगा

मुझसे साफ़ करने को कहा जाएगा
कूड़ा जो मैं फैला रहा हूँ

मेरी स्मृति इसी कूड़े में इच्छाशक्ति गई कूड़े में
भूल गया क्या था मेरा सामान कूड़ा याद रहा
ये जो अफ़सोस भरा सर लिए मैं जाता हूँ
जल्दी ही कहा जाएगा इसे फेंको
जीवन को जियो जीवन की तरह

मुझसे कहा जाएगा बेफ़िक्र हो जाओ
यह नहीं कहा जाएगा लोगों की फ़िक्र करो ताकि
वे तुम्हारी फ़िक्र करें

और एक सुबह नींद से उठ कर
मैं आज़ाद हो जाऊंगा
शरीर से छूटे पसीने की तरह आज़ाद !
*** 

3 comments:

  1. ये आपका स्थायी भाव इतना प्रभावशाली है तो....
    जो लोगों के ऊपर से निकल जाए तो कहते हैं कि रचना में दम है....
    मेरी स्मृति इसी कूड़े में इच्छाशक्ति गई कूड़े में
    भूल गया क्या था मेरा सामान कूड़ा याद रहा
    कुछ भी है दम है...

    ReplyDelete
  2. achhi kavita chuni aapne...yh apne aap men bahut kuch khti hai...mujhe to ab yh lagta hai ki asad jaise mushkil kavion ki aur kavitayen deni chahiye blog pr...vyomesh aapki kmi mhsoosh rhe the yahan...

    ReplyDelete
  3. असद वाकई असद हैं...

    ReplyDelete

यहां तक आए हैं तो कृपया इस पृष्ठ पर अपनी राय से अवश्‍य अवगत करायें !

जो जी को लगती हो कहें, बस भाषा के न्‍यूनतम आदर्श का ख़याल रखें। अनुनाद की बेहतरी के लिए सुझाव भी दें और कुछ ग़लत लग रहा हो तो टिप्‍पणी के स्‍थान को शिकायत-पेटिका के रूप में इस्‍तेमाल करने से कभी न हिचकें। हमने टिप्‍पणी के लिए सभी विकल्‍प खुले रखे हैं, कोई एकाउंट न होने की स्थिति में अनाम में नीचे अपना नाम और स्‍थान अवश्‍य अंकित कर दें।

आपकी प्रतिक्रियाएं हमेशा ही अनुनाद को प्रेरित करती हैं, हम उनके लिए आभारी रहेगे।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails