Sunday, May 25, 2008

असद ज़ैदी : अनुवाद की भाषा : अशोक पांडे

अनुवाद की भाषा



अनुवाद की भाषा से अच्छी क्या भाषा हो सकती है
वही है एक सफ़ेद परदा
जिस पर मैल की तरह दिखती है हम सबकी कारगुजारी


सारे अपराध मातृभाषाओं में किए जाते हैं
जिनमें हरदम होता रहता है मासूमियत का विमर्श


ऐसे दौर आते हैं जब अनुवाद में ही कुछ बचा रह जाता है
संवेदना को मार रही है
अपनी भाषा में अत्याचार की आवाज़ !


***

अशोक पांडे की संगत में मैंने अनुवाद करने शुरू किए और फलस्वरूप येहूदा आमीखाई का संकलन अस्तित्व में आया " धरती जानती है "..... अशोक के कारण ही विश्व कविता के द्वार मेरे आगे खुले , उसी को समर्पित है असद जी की ये अद्भुत कविता ........

6 comments:

  1. सच में अद्भुत है यह कविता. शुक्रिया.

    ReplyDelete
  2. असद जी की बात गहरी है। और आपने अशोक जी की 'कुसंगति' में जो सीखा है, वह भी उल्लेखनीय है। ऐसी संगति हर युवा रचनाकार को मिले। बधाई।

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन कविता . येहुदा आमीखाई का आपका अनुवाद देखने-पढने की इच्छा है .

    ReplyDelete
  4. धन्यवाद दोस्तो !
    प्रियंकर जी शुक्रिया ! किताब संवाद प्रकाशन से छपी है - हम दो अनुवादक हैं - अशोक और मैं !

    ReplyDelete
  5. प्रतिलिपि के नए अंक में हम मंगलेशदा की तीन कवितायें असदजी के अंग्रेज़ी अनुवादों में छाप रहे हैं. मंगलेशदा कोई फोटो नहीं भेज पा रहे; क्या आप हमे आपके ब्लॉग पर जो फोटो है उसे हुबहू इस्तेमाल करने की आज्ञा दे सकते हैं?

    ReplyDelete
  6. गिरिराज भाई जरूर छापिए, बस मेरे ब्लाग जिक्र दीजिएगा।

    ReplyDelete

यहां तक आए हैं तो कृपया इस पृष्ठ पर अपनी राय से अवश्‍य अवगत करायें !

जो जी को लगती हो कहें, बस भाषा के न्‍यूनतम आदर्श का ख़याल रखें। अनुनाद की बेहतरी के लिए सुझाव भी दें और कुछ ग़लत लग रहा हो तो टिप्‍पणी के स्‍थान को शिकायत-पेटिका के रूप में इस्‍तेमाल करने से कभी न हिचकें। हमने टिप्‍पणी के लिए सभी विकल्‍प खुले रखे हैं, कोई एकाउंट न होने की स्थिति में अनाम में नीचे अपना नाम और स्‍थान अवश्‍य अंकित कर दें।

आपकी प्रतिक्रियाएं हमेशा ही अनुनाद को प्रेरित करती हैं, हम उनके लिए आभारी रहेगे।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails