Saturday, April 5, 2008

1965

मैं आपा के बारे में बात कर रहा हूँ जो
अम्मी के बारे में बात करती थी जो शौहर के बारे में
बात करती थीं जो उस अफसर के बारे में बात करते थे
जो देश के बारे में बात करता था जो
युद्ध के बारे में बात कर रहा था चीखते हुए उन दिनों

पाकिस्तान के बारे में फिलहाल कोई बात नहीं करूंगा !

असद जी की ये बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करने वाली छोटी -सी कविता उनके पहले संकलन " बहनें और अन्य कवितायेँ " से ...............

4 comments:

  1. निःसंदेह ही बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करने वाली पंक्तियां.....बलाग जगत पर आने का यह फायदा भी हुया है कि मुझ जैसे पत्थर-दिल डाक्टरों को भी ये कोमल और झकझोरने वाले भाव समझ में आने लगे हैं।

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  2. बहुत सुंदर कविताएं हैं। आपके ब्लाग पर लगातार आती हूं बीच में खासा लंबा अरसा गायब रहने के बाद आप आए हैं और क्या खूब आए हैं। बने रहें हम पढ़ रहे हैं।

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  3. शुक्रिया दीपा जी !
    आपकी सहेली याद करती है !
    बेटा मजे मे होगा....
    और सर्दार जी भी ?

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  4. शिरीष धन्यवाद - आपका ई-मेल नहीं था इसलिए यहाँ (- मेरा मेरी प्रोफाईल में लगा है -) चूंकि यह और इसके पहले वाली गूढ़ लगी - मुझ मूढ़ ने असद जी की - कविता कोष और BBC हिन्दी में ढूंढ कर और कवितायेँ पढीं - अशोक का भी इन्हें पढने का आदेश था - जैदी साब को पढने / आदत डालने में थोड़ा समय लगेगा brownian motion में लहरती कविता पकड़ने में - आपके ब्लॉग से विशाल की कविताओं तक पहुंचा अच्छी लगीं - साभार - मनीष

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