Wednesday, October 3, 2007

एक जुलाई
पत्नी के जन्मदिन पर

किसी पके हुए फल सा
गिरा यह दिन
मेरे सबसे कठिन दिनों में

उस पेड को मेरा सलाम
जिस पर यह फला
सलाम उस मौसम को
उस रोशनी को
और उस नम सुखद अँधेरे को भी
जिसमे यह पका

अभी बाकी हैं इस पर
सबसे मुश्किल वक्तों के निशाँ

मेरी प्यारी !
कैसी कविता है यह जीवन
जिसे मेरे अलावा
बस तू समझती है

तेरे अलावा बस मैं !

शिरीष कुमार मौर्य

6 comments:

  1. पत्नी को जनम दिन की शुभ कामनाएँ। उसका नाम तो छाप दिया होता भाई

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  2. thank you vimal. Mujhe tumhare naam se hamesha 'vimal urf jaayein kahan' naam ki ek kitab yaad aati hai. mera salaam.

    ReplyDelete

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