अनुनाद

anunad
कविता

अपने बच्चों में ख़ुदा की सूरत देखती माँओं को क्या ज़वाब दोगे तुम/कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं

कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्‍यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में लौटती  इन कविताओं का

Read More »
कविता

जिन नदियों को पृथ्वी पर जगह न मिली उन्होंने चुन लिया मनुष्य की आँखों में रहना!/ज्योतिकृष्ण वर्मा की कविताएं

ज्‍योतिकृष्‍ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे आख्‍यान के रूप में

Read More »
कविता

वह धुंआ, तपती जमीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा – अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु की कविताओं का स्‍वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से

Read More »
कविता

तुम्हें ख़ून चूसने वालों के दांतों से अधिक चुभना चाहिए उनका भिंचा हुआ जबड़ा / पल्‍लवी की कविताऍं

पल्‍लवी की कविताएं समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों,पाखंड से संवेदना भरे मन में होने वाली उथल-पुथल को सामने लाती हैं। इन विसंगतियों से पार पाने के

Read More »
कहानी

महाकवि पिण्टा सुबोधिनी – प्रचण्‍ड प्रवीर

दोनोँ रचनाओँ की अन्‍यत्र अस्वीकृति के कारण निम्न हैँ: –   महाकवि पिण्टा की अस्वीकृति के कारण इस तरह बताए गए थे –१. विद्वेषपूर्ण रचना –

Read More »
समाज और संस्कृति

बैैजनाथ मंदिर (फोटो फीचर) – विनीता यशस्‍वी

बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा है, जो अल्मोड़ा से लगभग 70 किमी उत्तर-पश्चिम में है। ये कुमाऊँ हिमालय

Read More »
कहानी

परिणाम – कौशलेन्‍द्र

छत की मुंडेर से सटकर खड़े पुराने नीम के पेड़ की डाल से पत्तियां तोड़ते हुए, वो ढलती सांझ के सूरज को देख रहा था।

Read More »

सभी श्रेणियाॅं

समाज और संस्कृति

कविता

कथेतर गद्य

आलोचना-समीक्षा

अन्‍य

error: Content is protected !!
Scroll to Top